उस भारतीय वैज्ञानिक की कहानी जिससे डरता था, अमेरिका

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आज भारत के जाने-माने परमाणु वैज्ञानिक डाक्टर होमी जहांगीर भाभा जी का जन्मदिवस है, उनको भारत समेंत पूरी दुनिया में अपने काम और स्वभाव के लिए आज भी जाना जाता है, उनके नाम और काम को लेकर आज दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका भी इस कदर डरा हुआ था कि उसने डाक्टर भाभा का मरवाने का प्लान तैयार किया, अब सवाल ये उठता है कि आखिर अमेरिका का भाभा से क्या खतरा हो सकता है, दरअसल उसे भाभा से कोई खतरा नही था बल्कि उसे खतरा उनके काम से था और वो नही चाहता था कि भाभा की परमाणु क्षेत्र में शानदार पकड अमेरिका को दुनिया के नक्शे पर कमजोर कर दे.

इसी इरादे से अमेरिका के एक पूर्व निर्धारित घटना को अंजाम दिया, और फ्रांस के माउंट ब्लैंक शहर की ओर जा रहे एक विमान की हवाई दुर्घटना होती है और उस दुर्घटना में यात्रीयों समेंत भारत के परमाणु कार्यक्रम के अग्रदूत होमी जहांगीर भाभा भी मारे जाते हैं.

भारत की परमाणु ऊर्जा का सपना देखा

डाक्टर भाभा भारत की भूमि पर पैदा होने वाले अपने दौर से कही आगे के वैज्ञानिक थे, उन्होने उस वक्त परमाणु से नाभकिय ऊर्जा को लेकर अपनी रिसर्च शुरू कर दी थी जब दुनियाभर के वैज्ञानिक परमाणु के चेन का समझने का प्रयास कर रहे थे. भाभा ने भारत में ही परमाणु ऊर्जा का लेकर एक छोटी सी वैज्ञानिको की टीम के साथ परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की शुरूआत कर दी थी.

भाभा की मौत और उस से जुडे सवाल

होमी जहांगीर भाभा की मौत से जुडी दो थ्योरी है जिन पर लेकर आज भी बहस होती रहती है, एक थ्योरी ये करती है कि विमान अपनी दिशा से भटक गया था और जिनेवा एयर पोर्ट को अपनी लोकेशन नही दे पा रहा था, इसके बाद हो दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन दूसरी थ्योरी जो की जाने मानी अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ने कही है कि ये विमान दुर्घटना ग्रस्त नही हुआ बल्कि उसे बम विस्फोट के जरिए उडाया गया. और इस पूरे प्लान के पीछे अमेरिका खुफिया एजेंसी सीआईए का हाथ है, सीआईए अमेरिका के लिए दुनिया भर मे इस तरह की मौतों का अंजाम देती रहती है.

बहुत पहले की भारत बन जाता परमाणु शक्ति

साल 1965 में आल इंडिया रेडियों पर बोलते हुए उन्होने कहा था कि यदि उन्हे पूरी छूट दी जाए तो भारत को 18 महिनों में ही परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना देंगे, भाभा ये मानते थे की यदि भारत को दुनिया में एक मजबूत ताकत के रूप में उभरना है तो उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए परमाणु शक्ति का प्रयोग करना ही होगा, और वो भारत को एक परमाणु बम से लैस राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे.

अग्रेजी वेबसाइट से जुडे पत्रकार ग्रेगसी डगलस और सीआईए से जुडे अधिकारी राबर्ट क्रोओली के बीच हुई बातचीत से ये बात साफ हो जाती है कि भाभा को मरवाने के पीछे सीआईए का ही हाथ था और उन्होनें ही विमान के कारगो में बम रखवाया था, अमेरिका ये मानता था कि अगर भारत परमाणु हथियार विकसित कर लेता है तो पूरे दक्षिण एशिया में अमेरिका की पकड कमजोर हो जाएगी और रूस भारत के इस कार्यक्रम में सहयोग कर रहा है, रूस के किसी भी रूप में ताकतवर होने का मतलब है कि दुनिया में अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती मिलेगी जो वो किसी भी रूप मे नही चाहता. इस लिए उसने इस घटना को अंजाम दिया.

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