फिल्म चर्चा – फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पंचलैट फिल्मी पर्दे पर

लेखक- संतोष राय

कल एक फिल्म देखी पंचलैट – 50 के दशक की फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पर करीब 70 साल बाद बनी एक फिल्म कैसी होगी? इन सत्तर सालों में समाज कितना बदल गया है। दुनिया डेवलमेंट के नए कीर्तिमान बना रही है। मिट्टी के तेल वाले रौशनी के माध्यमों से होते हुए समाज आज एलईडी में जगमगा रहा है। इन सत्तर सालों में क्या हजारों सालों में जो एक चीज नहीं बदली जो कभी बदल भी नहीं सकती है वो है प्रेम की सहज वृत्ति। कहते हैं प्रेम ही है जो परमात्मा का दिया हुआ है – बाकी सारे मनोविकार अपने स्वार्थानुसार हम खुद ही गढ़ लेते हैं

पंचलैट यानी पेट्रोमैक्स अर्थात् 50 के दशक का रौशनी का एक माध्यम। गाँव में पहली बार खरीदकर लाया जाता है। पहले वस्तुएं आवश्यकता के हिसाब से आती थीं तो उनसे पैदा होने वाली खुशी दोगुनी नहीं, चौगुनी होती थी उसको किसी पैरामीटर से नहीं मापा जा सकता था – आज महँगी से महँगी वस्तुओं से मिलने वाली खुशी भी चंद दिन की मेहमान होती है। पहले वस्तुएं गाँव – मोहल्ले के हिसाब से आती थीं तो पूरा गाँव – पूरा मोहल्ला खुशी में डूब जाता था। खुशी का विस्तार था। सुख का फैलाव था। आज हम खुद के लिए जीते हैं तो जाहिर सी बात है हमारी खुशी का विस्तार भी हम तक ही सीमित है। हम इतने डेवलप हो गए हैं कि डेवलपमेंट ने स्वभाविक जीवन का रूप ही बिगाड़ कर रख दिया है। 

लेकिन एक चीज जो आज भी जहाँ भी है ठीक उसी रूप में हजारों साल से पड़ी है- ‘प्रेम की सहज वृत्ति’। कहानी में दरअसल गोधन और मुनरी का सहज प्रेम ही दर्शाने का मुख्य ध्येय रहा होगा फणीश्वरनाथ रेणु जी का – पर बहाना उन्होंने पंचलैट को चुना – मतलब कि पंचलैट के बहाने गोधन व मुनरी के सहज प्रेम का अंकन। साहित्य ही है जो प्रेम को सालों से सहेज कर रख पाया है। 

फिल्म पंचलैट फिल्म बाजारवाद से कोसों दूर करीब सत्तर साल पहले अनडेवलप्ड हमारे-आपके गाँव की ही एक कहानी है। फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर तीसरी कसम फिल्म बनी थी और अब उनकी कहानी पंचलैट पर फिल्म बनी है। फिल्म के सारे कलाकार थिएटर के मझे कलाकार हैं। प्रेम प्रकाश मोदी ने फिल्म को डायरेक्ट किया है। अमितोष नागपाल, अनुराधा मुखर्जी, यशपाल शर्मा का अभिनय काबिलेतारीफ है।

अगर फिल्म पसंद आई तो समझ लीजिएगा कि आपमें कुछ बचा है अन्यथा आप भी डेवलप हो गए हैं ऐसा मान लीजिएगा। हमारे साथ सिनेमा हॉल पंचलैट देखने सिर्फ पांच लोग पहुँचे थे। बताते हैं जिस दिन रिलीज हुई कहानी के सत्तर साल बाद उस सिनेमा हाल में उसको पर्दे पर देखने के लिए सिर्फ सात लोग पहुंचे थे।

फिल्म के प्रोमो से जुडा एक वीडियों…

Video Credit: YouTube and Zee Music Company

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