बाॅलीवुड के लिए नया नही है तीन तलाक का मुद्दा, तीन तलाक पर बनी फिल्में

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रसीका अरोडा, न्यूज हिंदी संवाददाता

मुंबई, सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक पर आए ऐतिहासिक फैसले की चर्चा हिन्दुस्तान के कोने-कोने में लोगों की जुबान पर हो रही है. इस फैसले के बाद विशेष तौर पर मुस्लिम धर्म से जुडी महिलाओं को काफी राहत महसूस हो रही है और कोर्ट  के फैसले के बाद उनकी लम्बे वक्त से चली आ रही लडाई को मनोबल मिला है.

अगर हम बात बाॅलीवुड की करें तो बाॅलीवुड के लिए ये विषय नया नही है, सालों से रह रह कर फिल्मों के माध्यम से इस बेहद गंभीर धार्मिक मसले पर फिल्मे बनती आ रही हैं. फिल्में अपने तरीके से धर्म और समाज में शामिल कुरीती के खिलाफ अपने तरीके से कभी सामाजिक ताने-बाने और कभी इस त्रासदी की शिकार हुई महिलाओं के जीवन में झाकती हुई आई है.

साल 1982 में बाॅलीवुड के जाने माने निर्देशक बी. आर. चोपडा साहब की फिल्म निकाह इसी मुद्दे से जुडी हुई थी, और इस फिल्म को समाज के हर तबके ने पसंद किया था. फिल्म निकाह चोपडा साहब के ड्रीम प्रोजेक्ट का एक हिस्सा थी और चोपडा साहब इस फिल्म की हर छोडी और बढी बारिकीयों पर अपनी पैनी नजर रखें हुए थे. 

फिल्म निकाह  के साथ जुडा दिलचस्प किस्सा…

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निकाह फिल्म का नाम शुरूआत में निकाह नही था, इस फिल्म का नाम तलाक,तलाक,तलाक था. जिस बात में चोपडा साहब के मित्र के कहने पर बदलकर निकाह कर दिया गया था. दरअसल चोपडा साहब के एक मुस्लिम मित्र में जब उनसे एक पार्टी के दौर पूछा की कौन की फिल्म बना रहे हो, तो चोपडा साहब से फिल्म का नाम बताया. फिल्म का नाम सुनकर उनके दोस्त ने कहा की आप की फिल्म में मुस्लिम महिलाओं का काफी दिक्कत का सामना करना पडेगा. ये जवाब सुन कर चोपडा साहब चौंक गए और वो पूछने लगे वो कैसे दोस्त तो उनके मित्र ने कहा की जब कोई मुस्लिम पुरूष फिल्म देखकर आएगा और उसकी पत्नी पूछेगी की कौन सी फिल्म देख कर आ रहे हो तो उसका जवाब होगा तलाक,तलाक,तलाक और उसका ये जबाव दोनों के बीच तलाक करवा देगा. क्योकिं धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि मुस्लिम पुरूष तीन बार अपनी पत्नी को तलाक बोल देता है तो दोनों के बीच तलाक माना जाता है और उन दोनों का साथ रहना हराम समझा जाता है. 

और इसके बाद भी यदि पति और पत्नी साथ रहना चाहते है तो पत्नी को किसी और से निकाह करने के बाद शारीरिक संबंध बनाने होते है और उसके बाद वो अपने उस पति को तलाक दे कर पहले वाले पति से एक बार फिर निकाह कर सकती है. इस पूरी प्रक्रिया का इस्लामिक मान्यता के अनुसार हलाला कहां जाता है.

अब चोपडा साहब का उद्देश्य फिल्म बनाकर समाज के इस पहलू को लोगों के सामने लाना था ना कि किसी पति-पत्नि के बीच तलाक करवाना. उन्होने अपनी टीम को बुलाया और फिल्म का नाम बदलने की तैयारी कि जाने लगी. फिल्म का नाम बदलकर निकाह रखा गया और इस फिल्म ने बाॅक्स आफिस पर कामयाबी के झंडे गाढ दिए.

इस फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए पाकिस्तानी एक्ट्रेस सलमा आगा को बेस्ट फिमेल प्लेबैंक के आॅवार्ड से नावाजा गया, इस फिल्म में राज बब्बर, दीपक पराशर और पाकिस्तानी एक्ट्रस सलगा आगा मुख्य भूमिका में थी.

फिल्म चौदवी का चांद…

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भारतीय सिनेमा के लेजेड्री जोडी गुरूदत्त साहब और वहीदा रहमान की सुपर हिट फिल्म चौदवी का चांद भी तीन तलाक के गंभीर मुद्दे के सामाजिक पहलू का उजागर करती है. फिल्म की बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी और लाईटिंग के अलावा तीन तलाक के मुद्दे को फिल्म में बेहद संजीदगी के साथ दिखाया गया, जिसे लोगों ने खासा पसंद भी किया.

तलाक

 

जुबली एक्टर और ट्रेजिडी किंग कहे जाने वाले एक्टर राजेंद्र कुमार की फिल्म तलाक भी तीन तलाक के मुद्दे से जुडी हुई थी, और इस फिल्म का निर्देशन किया था अपने जमाने के जाने-माने निर्देशक महेश कुमार ने, फिल्म को फिल्मफेयर आॅवार्ड के लिए नामांकित भी किया गया था.

 

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