मर्डर से जुडे दो मामलों में राम रहीम की कोर्ट में पेशी, खट्टा सिंह बयान देने को तैयार

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सिरसा- शहीद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या से जुडें दो मामलों में आज बलात्कारी बाबा राम रहीम सिंह कि सीबीआई की अदालत में विडियों काॅन्फ्रेंसिग के जरिये पेशी की गई. ये पहला मौका था जब किसी कैदी की सुनारिया जेल से वीडियों काॅन्फ्रेसिंग के जरिए पेशी की गई.

आज अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील एचके गर्ग और सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा के बीच जिरह हुई. इस पेशी के दौरान बाबा की बाॅडी लेंवेज आज पूरी तरह से बदली हुई थी, वो बाबा अदालत में हसता और नाचता हुआ आता था, आज वो पूरी सुनवाई के दौरान हाथ जोड कर खडा रहा और काफी नर्वस भी दिखाई दिया.

इस मामलें में आज एक और नया मोड भी आया जब बाबा के पूर्व सहयोगी और ड्राईवर खट्टा सिंह ने आज बाबा के खिलाफ गवाही देने की पेशकस की और जिस पर  कोर्ट में 22 सितम्बर मामले की अगली सुनवाई की तारीख मुकर्रर की है. इस दिन अदालत ये तय करेगी की खट्टा सिंह का बयान लिया जाए या नही, क्योकि खट्टा सिंह पहले भी अपने बयानों से मुकर चुका है.

आज की सुनवाई में राम रहीम के साथ इस हत्या के मामलें में आरोपी बनाए गए बाकि 7 लोगों को अदालत में पेश किया गया था. आज की सुनवाई को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा के कडे इतंजाम किए गए था. क्योकि रामरहीम से जुडें मामलें में पहले ही हरियाणा सरकार की काफी छिछा लेदर हो चुकी है इसलिए सरकार अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और सुरक्षा से जुडे किसी भी मामले में जोखिम नही उठाना चाहती. सुनवाई के बाद डीजीपी और मुख्यमंत्री लेवल की एक बैठक भी बुलाई गई है जिसमे सुरक्षा से जुडे हालातों का जायजा लिया जाएगा और देखा जाएगा की राज्य से कुछ अर्धसैनिक बलों की कंपनीयों को वापस भेजा जाए या नही.

क्या है ये पूरा मामला…

रणजीत सिंह डेरा की प्रबंधन समिति का सक्रिय सदस्य था और उसे कही ना कही  डेरा के अंदर हो रही गैर कानूनी गतिविधियों के बारें में जानकारी हो गई थी कि वहां कैसे दुनिया की आंखों में राम रहीम धूल झोकने का काम कर रहा है, राम रहीम को ये शक हो चुका था कि उसके खिलाफ मीडिया में चल रही उस गुमनामी चिट्टी के पीछे रणजीत सिंह का ही हाथ है, दरअसल माना ये जाता है कि रणजीत सिंह ही वो व्यक्ति था जिसने दोनों साध्वीयों में से एक के द्ववारा बलात्कारी बाबा की सच्चाई को लिखवाया था और बाद में ये चिट्ठी शहीद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के अखबार पूरा सच में छापी गई थी, जिसके बाद ये पूरा मामला देश की सुर्खियों में आया था. 

राम रहीम नें अपने गुंडो के साथ मिलकर रणजीत सिंह की हत्या 10 जुलाई 2002 की कर दी और उनका शव डेरे में ही गाड दिया गया. 

दूसरा मामला शहीद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुडा हुआ है, वो एक स्थानिय अखबार पूरा सच वहां से चलाते थे और अपने अखबार के जरिए उन्होनें डेरा प्रमुख के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था, अखबार स्थानिय था पर अखबार तो अखबार होता है और सच की ताकत को आप ज्यादा देर दबा कर नही रख सकते, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति, गणेश शंकर विध्दयाथी की परमंपरा से जुडे हुए पत्रकार थे और उन्होने ताकत वर सिस्टम के आगे झुक जाना नही सीखा था, उस गुमनामी चिट्ठी को पूरा सच अखबार के जरिए मंच मिला और बाबा ताकत से बने किले की जडे हिलने लगी.

24 अक्टूबर 2002 की शाम को राम रहीम के गुंडो में पत्रकार पर 5 राउंड गोलियां दागी और उनका लगा की वो मर चुके है और भगवान में छत्रपति जी को कुछ और सांसे दे रखी थी. इसके बाद उन्हे अस्पताल लाया गया जहां से उन्हे दिल्ली के अपोलो अस्पताल की तरफ रेफर कर दिया गया और करीब एक महीने तक वो जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे 21 नवंम्बर 2002 को उन्होने अपनी आखिरी सांसे ली, इस बीच वो पुलिस को अपना बयान दर्ज करवा चुके थे. उनकी मौत में इस पूरे मामले को चिंगारी से आग में तबदील कर दिया और उनके बेटे अंशुल छत्रपति में कानूनी लडाई के लिए मोर्चा सभ्हाला उन्होने हाई कोर्ट में पूरे मामले की सीबीआई जांच के लिए अर्जी दी और कोर्ट में मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई में डेरा प्रमुख के खिलाफ 15 साल पहले मुकद्मा दर्ज किया और 15 आज राम रहीम जेल की सलाखों के पीछे है और उम्मीद की जा रही है कि छत्रपति जी और रणजीत सिंह के गुनाहगारों को जल्द ही उनका रास्ता बता दिया जाएगा.

 

 

 

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