तीन साल से जांच रही है बीजेपी सरकार, यूपीए सरकार के द्वारा दी गई कालेधन पर 3 रिपोर्ट्स को

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नई दिल्ली, एक समाचार एजेंसी द्वारा जारी की गई जानकारी के मुताबिक केन्द्र की बीजेपी सरकार का वित्त मंत्रालय पिछले तीन सालों से उन तीन रिपोर्ट की जांच कर रहा है जो पिछली यूपीए सरकार द्वारा दी गई थी. ये जानकारी के आरटीआई के जरिए सामने आई है, वित्त मंत्रालय का कहना है कि आरटीआई कानून 2005 की धारा 8(1) के तरह इस जानकारी को पब्लिक डोमेन यानि जनसामान्य के लिए बताना जरूरी नही है. और अभी वित्त मंत्रालय इन रिपोर्ट की जांच कर रहा है और जांच के बाद की इस संसद के सामने रखी जाएगी, जबकि संसद की वित्त समित्ति के पास पहले ही ये रिपोर्ट जा चुकी है.

तीन सालों से इस रिपोर्ट पर अभी तक ठोस कार्यवाही ना करने पर केन्द्र की बीजेपी सरकार को सवालों से घेरा जा रहा है. हमारे देश में कालेधन के होने पर लम्बे वक्त से काफी हंगामा होता आया है और मोदी सरकार की विमुद्रीकरण और शैल कंपनीयों के खिलाफ की गई कार्यवाही की इसी दिशा में आगे बढते हुए कदमो के रूप में देखा जा रहा है.

हमारे देश में और देश से बाहर हिंदुस्तान का कितना कालाधान है इस बात हो लेकर अभी तक कोई अधिकारीक आंकडा हमारे पास नही है पर अमेरिका की एक रिसर्च एजेंसी ग्लोबल फाईनैंशयल इंटिग्रिटी के मुताबिक साल 2005 से 2014 के दौरान हिंदुस्तान में करीब 770 अरब डाॅलर आया जबकि 165 अरब डाॅलर हिंदुस्तान से बाहर भेजा गया.

जिन तीन  रिपोर्ट को यूपीएस सरकार के द्वारा तैयार कराया गया था उसे नेशनल काउंसिल आॅफ एप्लायड इकनाॅमिक रिसर्च , नेशनल इंस्टिटयूट आॅफ पब्लिक फाइनैंस एेंड पाॅलिसी और फरीदाबाद स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ फाइनैंशलय मैनेजमेंट के द्वारा तैयार किया गया और इन तीनों रिपोर्ट को 2013 और 2014 के बीच सरकार को सौपा गया था.

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